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    एक अनजाना सा सफर:- जिंदगी

    कभी कभी सोचती हु कि काश कुछ चीजो को खुद हि बदल सकती तो उसे खुद कि तरह जी पाती। गुजरते लम्हो को रोकना शायद हमारे हाथ मे होता। क़या कुछ एसा हो पाता कि रस्ता हमे नहि हम रास्ते को चुन पाते तो तो सफर भी खुबसुरत होता फिर मंजिल मिले न मिले। कितनी भी कोशिश कर लो जो सोचा हो ओर चाहा हो उसमे कुछ न कुछ तो होगा जो रेह जाएगा। हार ओर जीत के बिच शायद एक किस्मत का फासला हि तो होता हे जो हम सबको तय करना हि हे। बस कुछ लोगो कि किस्मत कि कश्तियो को किनारा मिल जाता हे तो कुछ किनारे…