Uncategorized

एक अनजाना सा सफर:- जिंदगी

कभी कभी सोचती हु कि काश कुछ चीजो को खुद हि बदल सकती तो उसे खुद कि तरह जी पाती। गुजरते लम्हो को रोकना शायद हमारे हाथ मे होता। क़या कुछ एसा हो पाता कि रस्ता हमे नहि हम रास्ते को चुन पाते तो तो सफर भी खुबसुरत होता फिर मंजिल मिले न मिले। कितनी भी कोशिश कर लो जो सोचा हो ओर चाहा हो उसमे कुछ न कुछ तो होगा जो रेह जाएगा। हार ओर जीत के बिच शायद एक किस्मत का फासला हि तो होता हे जो हम सबको तय करना हि हे। बस कुछ लोगो कि किस्मत कि कश्तियो को किनारा मिल जाता हे तो कुछ किनारे पर पहोचने से पेहले ही अपना दम तोड देती हे। गुलजार कि बडी बेहतरीन नज्म हे

 

 

” थोडा सा रफु करके देखिये ना ,
फिर से नयी सी लगेगी,
जिंन्दगी हि तो हे…………..”

हरेक चिज कुछ वकत के बाद पुरानी सी ही लगती हे फिर चाहे वो जिन्दगी हि क्यो न हो। कुछ लोग करते तो बहोत कुछ हे पर शायद कामयाबी पाना उनकी किस्मत मे होता ही नहि हे। ये जिंदगी भी तो यही सिखाति हे
” ऊम्र भर बोझ झेला उस किल ने ओर लोग तारिफ तसवीर कि करते रहे।”
हम सब कही न कही ये जानते हे कि जिन्दगी मे एक बात तो तय है कि कुछ भी तय नहि हे। फ़िर आदत सी हो गयी हे इस जिन्दगी को अपने खवाबो से देखने कि काश वो एसी होती तो जिंदगी कुछ ओर होती। एसी लिए अब दिल कि सुनकर जिना शूरु करो। दिल से फेसला करो तुम्हे कया करना हे दिमाग तरकीब निकाल ही लेगा। और जब लगे कि दर्द बरदास नही हो रहा तो तुम थ्हरो और वकत को जाने दो। खुशिया और गमो के लिये कुछ बेहतरीन कहा हे।

“नाराज
हमेशा खुशीया हि होती हे
गमो
के इतने नखरे नहि रहे”

जिन्दगी एक अनजाना सा सफर जिस पर चले बिना उसे समजा हि नहि जाएगा। अजीब तरह से गुजरती हे ये जिंदगी सोचा कुछ,किया कुछ,हुआ कुछ और मिला कुछ। सब कुछ करने पर भी कुछ तो होगा जो छुटेगा तो जो छुट रहा हे उसे छुटने दो और जो पास हे उसकी कदर करो।

” लगता हे आज जिंदगी कुछ खफा हे चलिए छोडीए कोन सी पहेली दफा हे “।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *